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डर की गूंज – भाग 1: सुनसान रास्ता | Echo of Fear – Part 1: The Lonely Road

Intro


जब रातें सन्नाटे से गूंजने लगें और हवाएं भी डरने लगें — तब समझो कोई अनदेखा सच तुम्हारा इंतज़ार कर रहा है।


डर की गूंज – भाग 1: सुनसान रास्ता | Echo of Fear – Part 1: The Lonely Road


डर की गूंज – भाग 1: सुनसान रास्ता


विक्रम एक स्वतंत्र पत्रकार था जिसे रहस्यमयी घटनाओं और पुराने गांवों की कहानियां खोजने का जुनून था। एक दिन उसे एक पुरानी डायरी हाथ लगी जिसमें एक ऐसे गांव का ज़िक्र था जहाँ 50 साल पहले अचानक सब लोग गायब हो गए थे। गांव का नाम था – 


विक्रम को ये नाम अजीब लगा, लेकिन दिलचस्पी इतनी थी कि उसने तय कर लिया – "इस बार की रिपोर्ट इसी गांव पर होगी।"


रात का सफर


रात के 9 बजे विक्रम अपने कैमरे, टॉर्च और नोटबुक के साथ गांव की ओर निकल पड़ा। मोबाइल नेटवर्क धीरे-धीरे गायब हो रहा था और रास्ता कच्चा व सुनसान होता जा रहा था।


पेड़ झुककर जैसे रास्ता रोक रहे थे और हर मोड़ पर अजीब सी सरसराहट सुनाई दे रही थी। पर विक्रम रुका नहीं।


पहला संकेत


जब वो गांव से 2 किलोमीटर दूर पहुंचा, उसे एक पुराना लकड़ी का पुल दिखा — लेकिन नीचे बहाव नहीं था, सिर्फ गाढ़ा काला पानी और धुंध थी।


पुल पर कदम रखते ही उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसका हाथ थामा हो...

उसने टॉर्च फेंककर देखा — कोई नहीं था।

पसीना उसके माथे से बहने लगा, लेकिन उसने खुद को मजबूत किया और आगे बढ़ गया।


कौन था वो?


गांव की सरहद पर पहुँचते ही उसे लगा जैसे कोई और उसके साथ चल रहा है। पीछे मुड़कर देखा – कोई नहीं।

लेकिन फिर... किसी ने धीरे से कहा:

"तुम क्यों आए हो?"


विक्रम घबरा गया। लेकिन खुद से बोला, "शायद दिमाग का वहम है।"


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