इस्लामी शायरी | islamic poetry | Islamic shayari
जब तन्हाई में रब का नाम लिया, तो लगा जैसे सारा जहान मेरे साथ हो गया। सजदे में सर रखा तो अश्क बह निकले, तेरी रहमत ने हर दर्द को मिठास दे दी। 🤲
कभी सोचा न था कि गुनाहों में भी तेरा करम मिलेगा, हर बार जब टूटा, तूने ही संभाला। या अल्लाह, तेरा शुक्र कैसे अदा करूं, तूने तो मेरी बेखुदी को भी इबादत बना दिया। 🌙
जब भी दिल टूटा, तेरा दरवाजा खटखटाया, नाउम्मीदी में भी तेरी रहमत बरसती रही। दुनिया ने चाहे जितना रुलाया, तेरे सजदे ने हर आंसू मोती बना दिया। 🌟
लब कांपते हैं तेरा नाम लेते हुए, आंखों से अश्क बरसते हैं तुझे पुकारते हुए। ऐ मेरे रब, तू ही मेरी रहमत है, तू ही मेरी आखिरी उम्मीद है। 🌿
हर चोट पर सब्र सिखाया तूने, हर दर्द में शुक्र अदा करना सिखाया तूने। जिन लम्हों में खुद से भी हार गया था, उन लम्हों में भी थाम लिया तूने। 💖
तेरे सजदे में जब भी झुके हम, आंखों से अश्कों के फूल बरस पड़े। या रब्ब, तेरी रहमत का एक कतरा भी, हमारी सारी तन्हाइयों को रोशन कर गया।
कितनी बार टूटा, बिखरा, गिरा, मगर हर बार तेरा ही सहारा मिला। ऐ मेरे मालिक, तेरी मेहरबानी ने,मुझे मेरी हार से भी जीतना सिखाया।
जब कोई अपना भी बेगाना लगा, तेरा करम ही था जो हमें थामे रहा। तेरी रहमत से ही आज भी जी रहे हैं, वरना तो कब के टूट गए होते।
हर सुबह तेरा शुक्र अदा करते हैं, हर रात तेरा फज़ल मांगते हैं। ऐ रब, तेरे बिना तो सांस लेना भी, बस एक बेकार आदत जैसा है।
"जब दिल सच्चाई से रब को पुकारे, तब अल्फाज़ खुद-ब-खुद नूर बन जाते हैं। यही वजह है कि जब भी दिल रोता है, तो सजदे में सुकून मिलता है। ये चंद अल्फाज़ उस ही सच्चे एहसास से निकले हैं, जो अल्लाह की रहमत पर यकीन रखते हैं।"
सजदों में गिरते हैं, दिल खुद-ब-खुद सुकून पा लेता है।
When we fall into sujood, our heart finds peace on its own.
तेरी रहमत की एक बूँद भी, हमारी पूरी ज़िंदगी बदल देती है।
Even a drop of Your mercy changes our entire life.
जिस पल सारे रास्ते बंद नज़र आए, उसी पल तेरा करम रास्ता बन गया।
When every path seemed closed, Your mercy created a way.
हर दर्द, हर ठोकर ने हमें तुझे और करीब ला दिया।
Every pain, every fall brought us closer to You.
तेरा शुक्र है, ऐ मेरे रब, तूने कभी अकेला नहीं छोड़ा।
Thank You, my Lord, You never left me alone.

