डूबा हुआ दर्द - ज़हर में भी ज़िंदा रहने की कहानी | dooba hua dard - zahar mein bhee zinda rahane kee kahaanee
डूबा हूँ ज़हर में, पर पी नहीं रहा, सह रहा हूँ ज़िंदगी को, जी नहीं रहा।
साँसें चल रही हैं मगर रूह मर चुकी है, मुस्कान है होठों पर, पर आँखें सब कह चुकी हैं।
टूटे हुए सपनों की आवाज़ नहीं आती, बस दिल के अंदर एक हलचल सी रह जाती।
दर्द की आदत हो गई है अब, खुशियाँ मिल भी जाएँ तो अजनबी लगती हैं।
हँसते हुए चेहरे के पीछे, एक रोता हुआ इंसान छुपा बैठा है।
ज़ख़्म ऐसे हैं कि दिखा भी नहीं सकता, और दर्द ऐसा कि सहा भी नहीं जाता।
खामोशी में भी तूफ़ान छुपा है, जो बाहर आया तो सब बहा ले जाएगा।
वक़्त से लड़कर थक चुका हूँ, अब बस ख़ुद से हारना बाकी है।
कभी-कभी ऐसा लगता है, जैसे मैं खुद से ही बेगाना हो गया हूँ।
जी रहा हूँ बस यूँ ही… जैसे कोई मजबूरी निभा रहा हूँ।
दर्द भरी शायरी, टूटे दिल की शायरी, इमोशनल शायरी हिंदी, दर्द भरी बातें, जख्मी दिल, ज़हर में डूबी शायरी, दिल छू लेने वाली शायरी, गहरी शायरी, दर्द का एहसास
Sad poetry, broken heart poetry, emotional poetry in Hindi, sad words, wounded heart, poetry drenched in poison, heart touching poetry, deep poetry, feeling of pain

