Rahmato Ka Safar - Ek Tauba Ki Kahani | रहमतों का सफर — एक तौबा की कहानी
अहसान नाम का एक नौजवान था जो एक छोटे से गांव में रहता था। बचपन से ही वह शरीफ, नमाजी और अपने मां-बाप का फ़रमाबरदार बेटा था। लेकिन जवानी में कदम रखते ही वह गलत दोस्तों की सोहबत में आ गया। धीरे-धीरे नमाजें छूटने लगीं, झूठ बोलना और ग़लत काम उसकी आदत बन गए।
मां-बाप बहुत दुखी थे, मगर उन्होंने कभी अपनी दुआओं में कमी नहीं छोड़ी। एक रात, अहसान अपने दोस्तों के साथ हराम कमाई के एक सौदे में जा रहा था। रास्ते में उसकी बाइक फिसल गई और वह बुरी तरह ज़ख्मी हो गया। जब आंख खुली तो वह अस्पताल में था, और उसके साथ कोई नहीं था... सिवाय एक बूढ़े दरवेश के।
दरवेश ने उसके सिर पर हाथ रखा और कहा:
"बेटा, अल्लाह ने तुम्हें एक और मौका दिया है, वापस लौट आओ।"
उन शब्दों ने अहसान के दिल को झकझोर दिया। उस रात अहसान ने पहली बार तहे दिल से तौबा की और अल्लाह से रो-रो कर अपने सारे गुनाहों की माफ़ी मांगी।
Yeh sirf shuruaat thi
अहसान ने अपने गांव लौटकर मां-बाप से माफ़ी मांगी। उसने पुराने सारे गुनाहों को छोड़ दिया और नई ज़िंदगी की शुरुआत की। अब वह सिर्फ नमाज का पाबंद ही नहीं था, बल्कि दूसरों को भी नेक राह दिखाने लगा।
लेकिन उसके इम्तिहान अभी खत्म नहीं हुए थे… क्योंकि शैतान कभी हार नहीं मानता।
कल के भाग में पढ़िए: ➡️ अहसान के सामने कौन सी बड़ी आज़माइश आई?
➡️ क्या वो अपने इरादे पर कायम रहा
या फिर से भटक गया?
To Be Continued... (Chapter 2 Coming Soon)
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